aaj ki tithi

Aaj Ki Tithi: आज 31 May 2025 का कैलेंडर. आज की तिथि…

Aaj Ki Tithi: आज की तिथि:

आज की तिथि (Aaj Ki Tithi) के साथ जानिए आज का पंचांग. हिन्दू कैलेंडर में मिलती है आपको (Aaj Ki Tithi) तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार की जानकारी. आपकी सुविधा के लिए इस पंचांग में आपको मिलेगी, राहु काल और दिशा शूल की पूरी जानकारी.

Aaj ka Suvichar) (Geeta Gyan: आज का सुविचार और गीता ज्ञान :-

गीता ज्ञान (Geeta Gyan) के सुविचार से होगा जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन, (Geeta Gyan) ज्ञान जीवन को स्थिर करता है. ये ज्ञान भगवान श्री कृष्ण जी द्वारा दिया गया है. इस ज्ञान से जीवन में खुशियों की बारिश होती है.

Kutumb Prabodhan: कुटुंब प्रबोधन ज्ञान :

कुटुम्ब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) से आप जानेंगे घर में प्यार बढ़ाने के उपाय. इन उपायों का पालन करने से आती है रिश्तों में मिठास. जीवन में धन के साथ परिवार के सुख का बहुत महत्व है. इसके लिए कुटुंब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) ज्ञान जरुरी है.

रोज का पंचांग What’s App पर पानें के लिए अपना नाम और स्थान +91-9911419079 पर भेजें.

आज की तिथि (Aaj Ki Tithi):- ज्येष्ठ मास (शुक्ल पक्ष) पंचमी 20:14 तक, बाद षष्ठी. युगाब्द 5127, विक्रमी संवत् 2082 तदनुसार 31 मई 2025, दिन शनिवार.

आज का नक्षत्र – पुष्य 21:06 तक.
आज का योग – वृद्धि 10:42 तक.
आज का करण – बव 08:42 तक, बाद बालव 20:14 तक.
आज का शुभ मुहूर्त – 11:52 से 12:48 दोपहर तक.
आज का राहुकाल – 08:52 से 10:36 सुबह तक.
आज का दिशा शूल – पूर्व दिशा.

Kutumb Prabodhan: आज का कुटुंब प्रबोधन ज्ञान :-
तनाव से लड़ना नहीं, उसे समझना सीखें।

कर्मों के फल से डरता है हर इन्सान, क्योंकि कर्म फल दाता हैं शनि भगवान.
शनि चालीसा पाठ से शनि देव को प्रसन्न करें और करें दिन की शुभ शुरुआत.

गीता ज्ञान (Geeta Gyan) चतुर्थ अध्याय श्लोक संख्या.19.
यस्य सर्वे समारम्भाः कामसंकल्पवर्जिताः ।
ज्ञानाग्निदग्धकर्माणं तमाहुः पंडितं बुधाः ॥

व्याख्या-
जिसके सम्पूर्ण शास्त्रसम्मत कर्म बिना कामना और संकल्प के होते हैं तथा जिसके समस्त कर्म ज्ञानरूप अग्नि द्वारा भस्म हो गए हैं, उस महापुरुष को ज्ञानीजन भी पंडित कहते हैं॥

आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar) (Geeta Gyan):-
गीता ज्ञान आज फिर बहुत गहरे विचार के साथ आया है, आज भगवान श्री कृष्ण बता रहें कि, कौनसा कर्म श्रेष्ठ है? इसका उत्तर देते हुए भगवान कहते हैं की, शास्त्र के नियम अनुसार किया गया कर्म ही श्रेष्ठ है. अब हर कोई तो ये नहीं जान पाता की शास्त्र कर्म के विषय में क्या कहता है. हम अपने जीवन में कौनसा कर्म करें और कौनसा कर्म ना करें. तो इस लिए भगवान बहुत ही सरल मार्ग बता रहें हैं कि, जिस कर्म के फल में आपकी आसक्ति ना हो ऐसा कर्म ही श्रेष्ठ है. जिसमे हमारा स्वार्थ ना हो ऐसा कर्म ही श्रेष्ठ है. इसी लिए शुरू से ही भगवान जी ये ही बता रहें हैं, की कर्मों को फल की आसक्ति का त्याग करते हुए ही करना चाहिए.

ज्योतिषाचार्य डॉ सुमित की ओर से प्रार्थना है, कि आपका दिन शुभ हो🙏🏻💐

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अपने आराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए, करें चालीसा पाठ. दिन के अनुसार करें या मन के अनुसार.

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