खाटू श्याम चालीसा (Khatu Shyam Chalisa)
खाटू श्याम चालीसा (Khatu Shyam Chalisa) खाटू श्याम जी की कृपा प्राप्ति का सबसे सरल मार्ग है. कलयुग के प्रत्यक्ष भगवान खाटू श्याम जी ही हैं, इन्हें खाटू नरेश के नाम से भी जाना जाता है. खाटू श्याम चालीसा (Khatu Shyam Chalisa) के पाठ करने के लिए रविवार का दिन विशेष माना जाता है. इस दिन भगवान को पेड़े का प्रसाद अर्पण किया जाता है.
खाटू श्याम चालीसा के लाभ (Benefits of Khatu Shyam Chalisa)
खाटू श्याम चालीसा (Khatu Shyam Chalisa) के पाठ से आज जीवन के सभी सुखों की प्राप्ति की जाती है. कलयुग के प्रत्यक्ष देवता के रूप में पूजे जाने वाले देवों में खाटू श्याम जी आज सभी पापों से मुक्त कर के सभी सुख और संसाधन प्रदान करते हैं.
खाटू श्याम चालीसा (Khatu Shyam Chalisa)
॥ दोहा॥
श्री गुरु चरणन ध्यान धर, सुमिर सच्चिदानंद ।
श्याम चालीसा पढ़त हूँ, रच चौपाई छंद ।
॥ चौपाई ॥
श्याम-श्याम भज बारंबारा। सहज ही हो भव सागर पारा॥
इन सम देव न दूजा कोई। दीन दयालु न दाता होई॥
भीम सुपुत्र अहिलवती जाया। कहीं भीम का पौत्र कहाया॥
यह सब कथा सही कल्पांतर। तनिक न मानों इसमें अंतर॥
बर्बरीक विष्णु अवतारा। भक्तन हेतु मनुज तन धारा॥
वासुदेव देवकी प्यारे। यसुमति मैया नंद दुलारे॥
मधुसूदन गोपाल मुरारी। बृजकिशोर गोवर्धन धारी॥
सियाराम श्री हरि गोबिंदा। दीनपाल श्री बाल मुकुंदा॥
दामोदर रण छोड़ बिहारी। नाथ द्वारिकाधीश खरारी॥
नरहरी रूप प्रहलाद प्यारा। खम्भ फारि हिरनाकुश मारा॥
राधाबल्लभ रुक्मणि कंता। गोपी बल्लभ कंस हनंता॥
मनमोहन चित चोर कहाए। माखन चोरि-चारि कर खाए॥
मुरलीधर यदुपति घनश्यामा। कृष्ण पतित पावन अभिरामा॥
मायापति लक्ष्मी पति ईशा। पुरुषोत्तम केशव जगदीशा॥
विश्वपति त्रिभुवन उजियारा। दीनबंधु भक्तन रखवारा॥
प्रभु का भेद न कोई पाया। शेष महेश थके मुनिराया॥
नारद शारद ऋषि योगिंदरर। श्याम-श्याम सब रटत निरंतर॥
करि कोविद करि सके न गिनंता। नाम अपार अथाह अनंता॥
हर सृष्टी हर युग में भाई। ये अवतार भक्त सुखदाई॥
ह्रदय मोहिं करि देखु विचारा। श्याम भजे तो हो निस्तारा॥
कैर पढ़ावत गणिका तारी। भिलनी की भक्ति बलिहारी॥
सती अहिल्या गौतम नारी। भई श्रापवश शिला दुलारी॥
श्याम चरण रज चित लाई। पहुंची पति लोक में जाही॥
अजामिल अरु सदन कसाई। नाम प्रताप परम गति पाई॥
जाके श्याम नाम अधारा। सुख लहहि दुःख दूर हो सारा॥
श्याम सुलोचन है अति सुंदर। मोर मुकुट सिर तन पीतांबर॥
गले बैजंती माल सुहाई। छवि अनूप भक्तन मन भाई॥
श्याम-श्याम सुमिरहु दिन-राती। श्याम दुपहरि अरु परभाती॥
श्याम सारथी जिस रथ के। रोड़े दूर होए उस पथ के॥
श्याम भक्त न कहीं पर हारा। भीर परि तब श्याम पुकारा॥
रसना श्याम नाम रस पी ले। जी ले श्याम नाम के हाले॥
संसारी सुख भोग मिलेगा। अंत श्याम सुख योग मिलेगा॥
श्याम प्रभु हैं तन के काले। मन के गोरे भोले-भाले॥
श्याम संत भक्तन हितकारी। रोग-दोष अध नाशे भारी॥
प्रेम सहित जे नाम पुकारा। भक्त लगत श्याम को प्यारा॥
खाटू में हैं मथुरावासी। पारब्रह्म पूर्ण अविनाशी॥
सुधा तान भरि मुरली बजाई। चहु दिशि नाना जहां सुनी पाई॥
वृद्ध-बाल जेते नारि नर। मुग्ध भये सुनि बंशी के स्वर॥
दौड़ दौड़ पहुंचे सब जाई। खाटू में जहां श्याम कन्हाई॥
जिसने श्याम स्वरूप निहारा। भव भय से पाया छुटकारा॥
॥ दोहा ॥
श्याम सलोने संवारे, बर्बरीक तनुधार।
इच्छा पूर्ण भक्त की, करो न लाओ बार॥
॥ इति श्री खाटू श्याम चालीसा ॥
अपने आराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए, करें चालीसा पाठ. दिन के अनुसार करें या मन के अनुसार.
- दुर्गा चालीसा , गणेश चालीसा, हनुमान चालीसा, संतोषी चालीसा, शिव चालीसा, सूर्य चालीसा, शनि चालीसा, विष्णु चालीसा, गायत्री चालीसा, काली चालीसा, शारदा चालीसा, खाटू श्याम चालीसा, श्री राम चालीसा, श्री महालक्ष्मी चालीसा, बगलामुखी चालीसा, श्री गौरी चालीसा, वैष्णों चालीसा, भैरव चालीसा, श्री ललिता चालीसा, सरस्वती चालीसा, श्री परशुराम चालीसा.

