Aaj Ki Tithi: आज की तिथि:
आज की तिथि Aaj Ki Tithi के साथ जानिए आज का पंचांग. हिन्दू कैलेंडर में मिलती है आपको Aaj Ki Tithi तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार की जानकारी. आपकी सुविधा के लिए इस पंचांग में आपको मिलेगी, राहु काल और दिशा शूल की पूरी जानकारी.
Geeta Gyan: आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar) :
गीता ज्ञान Geeta Gyan के सुविचार से होगा जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन, Geeta Gyan ज्ञान जीवन को स्थिर करता है. ये ज्ञान भगवान श्री कृष्ण जी द्वारा दिया गया है. इस ज्ञान से जीवन में खुशियों की बारिश होती है.
Kutumb Prabodhan: कुटुंब प्रबोधन ज्ञान:
कुटुम्ब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) से आप जानेंगे घर में प्यार बढ़ाने के उपाय. इन उपायों का पालन करने से आती है रिश्तों में मिठास. जीवन में धन के साथ परिवार के सुख का बहुत महत्व है. इसके लिए कुटुंब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) ज्ञान जरुरी है.
आज की तिथि (Aaj Ki Tithi):- ज्येष्ठ मास (शुक्ल पक्ष) पूर्णिमा 13:12 तक. युगाब्द 5127, विक्रमी संवत् 2082 तदनुसार 11 जून 2025, दिन बुधवार.
रोज का पंचांग What’s App पर पानें के लिए अपना नाम और स्थान +91- 9911419079 पर भेजें.
आज का नक्षत्र – ज्येष्ठा 20:09 तक.
आज का योग – साध्य 14:02 तक.
आज का करण – बव 13:12 तक, बाद बालव 25:52 तक.
आज का शुभ मुहूर्त – 11:55 से 12:51 दोपहर तक.
आज का राहुकाल -12:23 से 14:08 दोपहर तक.
आज का दिशा शूल – पश्चिम दिशा.
आज का कुटुंब प्रबोधन ज्ञान (Kutumb Prabodhan):-
पीढ़ियों को जोड़ना ही प्रबोधन है।
बुधवार के दिन करें गणेश चालीसा का पाठ और दिन को शुभ बनाएं.
गणेश चालीसा सुननें से करें दिन की शुरुआत. लिंक पर जाएँ.
गीता ज्ञान (Geeta Gyan) चतुर्थ अध्याय श्लोक संख्या.31.
यज्ञशिष्टामृतभुजो यान्ति ब्रह्म सनातनम् ।
नायं लोकोऽस्त्ययज्ञस्य कुतोऽन्यः कुरुसत्तम ॥
व्याख्या-
हे कुरुश्रेष्ठ अर्जुन! यज्ञ से बचे हुए अमृत का अनुभव करने वाले योगीजन सनातन परब्रह्म परमात्मा को प्राप्त होते हैं। और यज्ञ न करने वाले पुरुष के लिए तो यह मनुष्यलोक भी सुखदायक नहीं है, फिर परलोक कैसे सुखदायक हो सकता है?॥
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आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar) (Geeta Gyan):-
आज का गीता ज्ञान जान कर आपको एक बात जरुर समझ आएगी, कि शास्त्र में किसी भी विषय को सीधे सीधे नहीं कहा गया है. हर बात को सूत्रों के द्वारा ही कहा जाता है, आज के श्लोक में भगवान जी बता रहें हैं की हवन से बचे हुए को ही ग्रहण करना ही संतुष्टों का लक्ष्ण हैं. अब आम इन्सान इसे कुछ ऐसे समझता है, कि जो हवन में भगवान को अर्पण करते हैं उसे ही हमें खाना चाहिए. परन्तु यहाँ शास्त्र कर्म को भी यज्ञ कहता है. और इस का भाव है की हवन मतलब कर्म करने से जो भी फल प्राप्त होता है उसका ही भोग करना चाहिए. अधिक की जिज्ञासा रखना या कामना करना उचित नहीं होता. आप सभी से निवेदन है शास्त्रों को हर दृष्टी से चिंतन कर के समझने का प्रयास करें.
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ज्योतिषाचार्य Dr. Sumit की ओर से प्रार्थना है, कि आपका दिन शुभ हो🙏🏻💐
हारे का सहारा है बाबा श्याम हमारा. खाटू श्याम जी की कृपा प्राप्त करें.
कुंडली विश्लेषण के लिए लिंक को छू कर वेबसाइट के अपॉइंटमेंट सेक्शन में जाएँ.
अपने आराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए, करें चालीसा पाठ. दिन के अनुसार करें या मन के अनुसार.
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