Aaj Ki Tithi: आज की तिथि :
आज की तिथि Aaj Ki Tithi 6 june 2025 के दिन के हिन्दू कैलेंडर में मिलती है आपको Aaj Ki Tithi तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार की जानकारी. आपकी सुविधा के लिए इस पंचांग में आपको मिलेगी, राहु काल और दिशा शूल की पूरी जानकारी.
Geeta Gyan: आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar):
गीता ज्ञान Geeta Gyan के सुविचार से होगा जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन, Geeta Gyan ज्ञान जीवन को स्थिर करता है. ये ज्ञान भगवान श्री कृष्ण जी द्वारा दिया गया है. इस ज्ञान से जीवन में खुशियों की बारिश होती है.
Kutumb Prabodhan: कुटुंब प्रबोधन ज्ञान :
कुटुम्ब प्रबोधन Kutumb Prabodhan से आप जानेंगे घर में प्यार बढ़ाने के उपाय. इन उपायों का पालन करने से आती है रिश्तों में मिठास. जीवन में धन के साथ परिवार के सुख का बहुत महत्व है. इसके लिए कुटुंब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) ज्ञान जरुरी है.
आज की तिथि (Aaj Ki Tithi):- ज्येष्ठ मास (शुक्ल पक्ष) एकादशी 28:47 तक, बाद द्वादशी. युगाब्द 5127, विक्रमी संवत् 2082 तदनुसार 6 जून 2025, दिन शुक्रवार.
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आज का नक्षत्र – हस्त 06:32 तक, बाद चित्रा.
आज का योग – व्यतिपात 10:11 तक.
आज का करण – वणिज 15:30 तक, बाद विष्टि 28:47 तक.
आज का शुभ मुहूर्त – 11:54 से 12:49 दोपहर तक.
आज का राहुकाल -10:37 से 12:22 दोपहर तक.
आज का दिशा शूल – पश्चिम दिशा.
आज का कुटुंब प्रबोधन ज्ञान (Kutumb Prabodhan):-
घर को ‘स्थान’ नहीं, ‘भावना’ बनाएं।
ललिता माता की कृपा से प्राप्त होगा जीवन में सुख.
ललिता चालीसा पाठ से करें दिन की शुभ शुरुआत.
गीता ज्ञान (Geeta Gyan) चतुर्थ अध्याय श्लोक संख्या.25.
दैवमेवापरे यज्ञं योगिनः पर्युपासते ।
ब्रह्माग्नावपरे यज्ञं यज्ञेनैवोपजुह्वति ॥
व्याख्या-
कुछ योगीजन देवताओं के पूजनरूप यज्ञ का ही भलीभाँति अनुष्ठान किया करते हैं और अन्य योगीजन परब्रह्म परमात्मारूप अग्नि में अभेद दर्शनरूप यज्ञ द्वारा ही आत्मरूप यज्ञ का हवन किया करते हैं।॥
(Geeta Gyan) आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar) :-
हमारा जीवन कैसा है, क्या हम गृहस्त जीवन का पालन करते हैं या सन्यासी उसी के अनुसार हम सब के कर्म अलग अलग हैं. जिस प्रकार सन्यासी दुनियां के सभी उपभोगों को छोड़ कर यज्ञ कर्म में लगे रहते हैं उसी प्रकार हम सब जो गृहस्त आश्रम में हैं, हमें भी अपने कर्मों को पूरा करना जरुरी है. अब बात समानता की है तो जिस प्रकार सन्यासी केवल अपना यज्ञ कर्म करता है उसी प्रकार हमें भी केवल अपना कर्म करना है उसके फल की इच्छा का त्याग करना होगा. तभी हम उस योगी की तरह योगी बन सकते हैं. अब मन में प्रश्न आता है की घर में रहते हुए ये सब निष्काम कर्म कैसे संभव है. यहाँ हम अपने विचार को व्यक्त करते हुए कह रहें हैं, कि हमारे सब कर्म निष्काम नहीं भी हो सकते हैं तो शुरुआत तो की जा सकती है. जब शुरुआत होगी तो मंजिल भी मिल ही जाएगी. इस लिए ईश्वर प्राप्ति के लिए एक कदम बढ़ाने का ये सरल मार्ग है. निष्काम कर्म. जिसे सेवा भाव कहा जाता है.
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ज्योतिषाचार्य Dr. Sumit की ओर से प्रार्थना है, कि आपका दिन शुभ हो🙏🏻💐
लक्ष्मी चालीसा से होती है घर में धन धान्य की वर्षा और मिलेगी कर्ज से मुक्ति.
कुंडली विश्लेषण के लिए लिंक को छू कर वेबसाइट के अपॉइंटमेंट सेक्शन में जाएँ.
अपने आराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए, करें चालीसा पाठ. दिन के अनुसार करें या मन के अनुसार.
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