गुप्त नवरात्रि 2026 | तिथि: 15 जुलाई 2026 से 22 जुलाई 2026
लेखक: ज्योतिषाचार्य डॉ. सुमित कुमार
वेबसाइट: JyotishKundli.co.in
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि कब से…
सनातन धर्म में माता आदिशक्ति की उपासना के लिए वर्ष में चार नवरात्रि आती हैं। इनमें दो चैत्र एवं शारदीय नवरात्रि प्रत्यक्ष रूप से मनाई जाती हैं, जबकि माघ एवं आषाढ़ मास की गुप्त नवरात्रि विशेष रूप से साधना, मंत्र सिद्धि, आध्यात्मिक उन्नति तथा गुप्त मनोरथों की पूर्ति के लिए अत्यंत शुभ मानी गई हैं।
आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा से प्रारंभ होने वाली गुप्त नवरात्रि वर्ष 2026 में 15 जुलाई से प्रारंभ होकर 22 जुलाई 2026 (नवमी) तक रहेगी। इसके पश्चात 25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु योगनिद्रा में चले जाते हैं, जिसके बाद चातुर्मास प्रारंभ होता है और विवाह, गृहप्रवेश आदि अनेक मांगलिक कार्य स्थगित हो जाते हैं। इसलिए गुप्त नवरात्रि साधना, पूजा एवं देवी कृपा प्राप्त करने का अत्यंत महत्वपूर्ण अवसर है।
यदि आप अपने जीवन में सफलता, स्वास्थ्य, धन, संतान सुख, मानसिक शांति, शत्रु बाधा से मुक्ति या किसी विशेष मनोरथ की सिद्धि चाहते हैं, तो गुप्त नवरात्रि का यह समय आपके लिए अत्यंत शुभ हो सकता है।
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि का महत्व
गुप्त नवरात्रि का उल्लेख विभिन्न तांत्रिक एवं शक्त उपासना परंपराओं में विशेष रूप से मिलता है। इस काल में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ दस महाविद्याओं की उपासना भी की जाती है।
गुप्त नवरात्रि का उद्देश्य केवल भौतिक सुख प्राप्त करना नहीं है, बल्कि आत्मबल, आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक स्थिरता और ईश्वर के प्रति समर्पण को विकसित करना भी है।
इस अवधि में की गई साधना से-
– मां भगवती की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
– नकारात्मक ऊर्जा एवं बाधाओं का नाश होता है।
– ग्रह दोषों की शांति में सहायता मिलती है।
– मनोकामनाओं की पूर्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
– आत्मविश्वास और सकारात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है।
– आध्यात्मिक साधना में प्रगति होती है।
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में क्या करें?
यदि आप माता की विशेष कृपा प्राप्त करना चाहते हैं तो इन नौ दिनों में निम्न कार्य अवश्य करें—
1. कलश स्थापना करें
प्रतिपदा तिथि पर शुभ मुहूर्त में कलश स्थापना कर अखंड दीपक जलाएं।
2. मां दुर्गा के नौ स्वरूपों का पूजन करें
प्रतिदिन स्नान के बाद लाल पुष्प, अक्षत, रोली, चंदन एवं नैवेद्य अर्पित करें।
3. दुर्गा सप्तशती का पाठ करें
यदि संपूर्ण पाठ संभव न हो तो कवच, अर्गला स्तोत्र, कीलक एवं सिद्ध कुंजिका स्तोत्र का पाठ करें।
4. नवर्ण मंत्र का जप करें
“ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे”
इस मंत्र का प्रतिदिन कम से कम 108 बार जप अत्यंत शुभ माना जाता है।
5. कन्या एवं गौ सेवा करें
सामर्थ्य अनुसार कन्याओं को भोजन, वस्त्र अथवा दक्षिणा दें तथा गौ सेवा करें।
6. सात्त्विक भोजन ग्रहण करें
फलाहार या सात्त्विक भोजन करें तथा मन, वचन और कर्म की शुद्धता बनाए रखें।
7. ब्रह्मचर्य एवं संयम का पालन करें
इन दिनों इन्द्रिय संयम और सदाचार साधना की सफलता में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
8. गरीब एवं जरूरतमंद लोगों की सहायता करें
दान, सेवा और करुणा देवी उपासना का महत्वपूर्ण अंग माने गए हैं।
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि में क्या नहीं करें?
इन नौ दिनों में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए-
– क्रोध, अहंकार और कटु वचन से बचें।
– मांस, मदिरा एवं नशे का सेवन न करें।
– झूठ, छल-कपट और अनैतिक कार्यों से दूर रहें।
– किसी का अपमान या अनावश्यक विवाद न करें।
– पूजा स्थल की पवित्रता बनाए रखें।
– बिना गुरु मार्गदर्शन के जटिल तांत्रिक प्रयोग करने से बचें।
– नकारात्मक विचारों एवं निराशा को अपने ऊपर हावी न होने दें।
गुप्त नवरात्रि में मां भगवती की पूजा कैसे करें?
प्रतिदिन प्रातः स्नान कर स्वच्छ एवं अधिमानतः लाल अथवा पीले वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थान को शुद्ध कर चौकी पर लाल वस्त्र बिछाएं और उस पर मां दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। कलश स्थापना करें तथा दीपक और धूप जलाएं।
इसके बाद—
– गणेश पूजन
– कलश पूजन
– मां भगवती का आवाहन
– पंचोपचार अथवा षोडशोपचार पूजन
– लाल पुष्प अर्पण
– दुर्गा सप्तशती अथवा देवी महात्म्य पाठ
– नवर्ण मंत्र जप
– आरती
– क्षमा प्रार्थना
करें।
अंत में प्रसाद वितरित करें तथा अपनी मनोकामना मां भगवती के चरणों में समर्पित करें।
Gupt Navratri 2026: विशेष ज्योतिषीय उपाय
यदि आपकी कुंडली में राहु, केतु, शनि या चंद्र से संबंधित समस्याएं हैं, तो गुप्त नवरात्रि में निम्न उपाय लाभकारी माने जाते हैं—
– प्रतिदिन दुर्गा चालीसा का पाठ करें।
– “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जप करें।
– लाल पुष्प एवं चुनरी अर्पित करें।
– कन्याओं को भोजन कराएं।
– पीपल एवं गौ सेवा करें।
– जरूरतमंद महिलाओं को लाल वस्त्र या श्रृंगार सामग्री का दान करें।
Gupt Navratri 2026: गुप्त नवरात्रि और देवशयनी एकादशी
25 जुलाई 2026 को देवशयनी एकादशी के साथ भगवान विष्णु योगनिद्रा में प्रवेश करेंगे और चातुर्मास प्रारंभ होगा। परंपरागत मान्यता के अनुसार इसके पश्चात विवाह, गृहप्रवेश, मुंडन एवं अन्य अनेक मांगलिक कार्य स्थगित हो जाते हैं। इसलिए गुप्त नवरात्रि साधना, जप, तप, दान एवं देवी उपासना के लिए अत्यंत शुभ अवसर माना जाता है।
निष्कर्ष:-
गुप्त नवरात्रि केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, साधना, संयम और मां भगवती के प्रति समर्पण का पावन अवसर है। सच्ची श्रद्धा, सात्त्विक जीवन, नियमित जप, सेवा और सदाचार के साथ की गई उपासना व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकती है।
यदि आप किसी विशेष उद्देश्य, ग्रह दोष, स्वास्थ्य, विवाह, संतान, करियर या आर्थिक उन्नति के लिए देवी साधना करना चाहते हैं, तो योग्य गुरु के मार्गदर्शन में साधना करना अधिक हितकारी माना जाता है।
FAQ :-
प्रश्न 1. गुप्त नवरात्रि 2026 कब से कब तक है?
उत्तर: 15 जुलाई 2026 से 22 जुलाई 2026 तक।
प्रश्न 2. गुप्त नवरात्रि का मुख्य महत्व क्या है?
उत्तर: देवी उपासना, मंत्र जप, साधना, आध्यात्मिक उन्नति एवं मनोकामना पूर्ति के लिए यह विशेष समय माना जाता है।
प्रश्न 3. गुप्त नवरात्रि में कौन-सा मंत्र जपें?
उत्तर: “ॐ ऐं ह्रीं क्लीं चामुण्डायै विच्चे” मंत्र का जप अत्यंत शुभ माना जाता है।
प्रश्न 4. क्या गुप्त नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती का पाठ करना चाहिए?
उत्तर: हाँ, श्रद्धा और विधिपूर्वक दुर्गा सप्तशती अथवा देवी महात्म्य का पाठ अत्यंत फलदायी माना गया है।
प्रश्न 5. गुप्त नवरात्रि में किन बातों से बचना चाहिए?
उत्तर: क्रोध, नशा, तामसिक भोजन, असत्य, अपमान, अनैतिक कार्य तथा बिना गुरु के तांत्रिक प्रयोगों से बचना चाहिए।

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