aaj ki tithi

Aaj Ki Tithi: आज 26 May 2025 का कैलेन्डर: आज की तिथि…

(Aaj Ki Tithi) आज की तिथि:

आज की तिथि (Aaj Ki Tithi) के साथ जानिए आज का पंचांग. हिन्दू कैलेंडर में मिलती है आपको (Aaj Ki Tithi) तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार की जानकारी. आपकी सुविधा के लिए इस पंचांग में आपको मिलेगी, राहु काल और दिशा शूल की पूरी जानकारी. 

(Aaj ka Suvichar) (Geeta Gyan) आज का सुविचार और गीता ज्ञान:

गीता ज्ञान (Geeta Gyan) के सुविचार से होगा जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन, (Geeta Gyan) ज्ञान जीवन को  स्थिर करता है. ये ज्ञान भगवान श्री कृष्ण जी द्वारा दिया गया है. इस ज्ञान से जीवन में खुशियों की बारिश होती है. 

(Kutumb Prabodhan) कुटुंब प्रबोधन ज्ञान: 

कुटुम्ब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) से आप जानेंगे घर में प्यार बढ़ाने के उपाय. इन उपायों का पालन करने से आती है रिश्तों में मिठास. जीवन में धन के साथ परिवार के सुख का बहुत महत्व है. इसके लिए कुटुंब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) ज्ञान जरुरी है.

https://jyotishkundli.co.in/aaj-ka-rashifal-todays-horoscope-26-may-2025

आज की तिथि (Aaj Ki Tithi):- ज्येष्ठ मास (कृष्ण पक्ष) चतुर्दशी 12:11 तक, बाद अमावस्या. युगाब्द 5127, विक्रमी संवत् 2082 तदनुसार 26 मई 2025, दिन सोमवार.

आज का नक्षत्र – भरणी 08:22 तक. 

आज का योग – शोभन 07:00 तक बाद अतिगण्ड. 

आज का करण – शकुनी 12:11 तक, बाद चतुष्पद 22:20 तक.   

आज का शुभ मुहूर्त – 11:52 से 12:47 दोपहर तक. 

आज का राहुकाल – 07:09 से 08:53 सुबह तक. 

आज का दिशा शूल – पूर्व दिशा.

आज का कुटुंब प्रबोधन ज्ञान (Kutumb Prabodhan):-

सहनशीलता से ही संबंध टिकते हैं।

इस धरती का हर कंकर कंकर शंकर है… 

महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिव चालीसा का पाठ करें, चालीसा पाठ के लिए लिंक पर जाएँ. 

गीता ज्ञान (Geeta Gyan) चतुर्थ अध्याय श्लोक संख्या.14.

न मां कर्माणि लिम्पन्ति न मे कर्मफले स्पृहा ।

इति मां योऽभिजानाति कर्मभिर्न स बध्यते ॥

व्याख्या-

कर्मों के फल में मेरी स्पृहा नहीं है, इसलिए मुझे कर्म लिप्त नहीं करते- इस प्रकार जो मुझे तत्व से जान लेता है, वह भी कर्मों से नहीं बँधता॥

आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar) (Geeta Gyan):-

हम सब का अधिकार कर्म करने में हैं उसका फल कैसा मिलेगा वो निर्णय हम नहीं ले सकते, ये ही कह रहें हैं आज भगवान श्री कृष्ण. अगर हम कर्म करने के लिए बाद उसके फल की उम्मीद अपनी इच्छा के अनुसार करते हैं तो उसे कर्म फल की आसक्ति कहते हैं. और भगवान कर्म फल में आसक्ति ना रखने के लिए कहते हैं, इस आसक्ति से ही मनुष्य कर्म बन्धनों में बंध जाता है. और मनुष्य को दुखों का सामना करना पड़ता है. कर्म फल में आसक्ति ही मनुष्य को इस दुनीयां के बन्धनों में बांधते हैं. 

ज्योतिषाचार्य Dr. Sumith की ओर से प्रार्थना है, कि आपका दिन शुभ हो🙏🏻💐

शिव की भक्ति के साथ शक्ति की उपासना से होता है विशेष लाभ, दुर्गा चालीसा के लिए लिंक पर जाएँ. 

कुंडली विश्लेषण के लिए लिंक को छू कर वेबसाइट के अपॉइंटमेंट सेक्शन में जाएँ. 

अपने आराध्य देव को प्रसन्न करने के लिए, करें चालीसा पाठ. दिन के अनुसार करें या मन के अनुसार.