(Aaj Ki Tithi) आज की तिथि :
आज की तिथि (Aaj Ki Tithi) के साथ जानिए आज का पंचांग. हिन्दू कैलेंडर में मिलती है आपको (Aaj Ki Tithi) तिथि, नक्षत्र, योग, करण और वार की जानकारी. आपकी सुविधा के लिए इस पंचांग में आपको मिलेगी, राहु काल और दिशा शूल की पूरी जानकारी.
(Geeta Gyan) आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar):
गीता ज्ञान (Geeta Gyan) के सुविचार से होगा जीवन में महत्वपूर्ण परिवर्तन, (Geeta Gyan) ज्ञान जीवन को स्थिर करता है. ये ज्ञान भगवान श्री कृष्ण जी द्वारा दिया गया है. इस ज्ञान से जीवन में खुशियों की बारिश होती है.
(Kutumb Prabodhan) कुटुंब प्रबोधन ज्ञान :
कुटुम्ब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) से आप जानेंगे घर में प्यार बढ़ाने के उपाय. इन उपायों का पालन करने से आती है रिश्तों में मिठास. जीवन में धन के साथ परिवार के सुख का बहुत महत्व है. इसके लिए कुटुंब प्रबोधन (Kutumb Prabodhan) ज्ञान जरुरी है.
आज की तिथि (Aaj Ki Tithi):- ज्येष्ठ मास (कृष्ण पक्ष) दशमी 25:11 तक, बाद एकादशी. युगाब्द 5127, विक्रमी संवत् 2082 तदनुसार 22 मई 2025, दिन गुरुवार.
आज का नक्षत्र – पूर्वाभाद्रपद 17:46 तक.
आज का योग – विष्कुम्भ 21:48 तक.
आज का करण – वणिज 14:20 तक, बाद विष्टि 25:11 तक.
आज का शुभ मुहूर्त – 11:52 से 12:47 दोपहर तक.
आज का राहुकाल – 14:03 से 15:46 दोपहर तक.
आज का दिशा शूल – दक्षिण दिशा.
आज का कुटुंब प्रबोधन ज्ञान (Kutumb Prabodhan):-
पुरुष और स्त्री दोनों का दायित्व बराबर है।।
सभी सुख प्रदान करते हैं विष्णुभगवान.
श्री विष्णु चालीसा पाठ से करें विष्णु भगवान को प्रसन्न, चालीसा पाठ के लिए लिंक पर जाएँ.
गीता ज्ञान (Geeta Gyan) चतुर्थ अध्याय श्लोक संख्या.10.
वीतरागभय क्रोधा मन्मया मामुपाश्रिताः ।
बहवो ज्ञानतपसा पूता मद्भावमागताः ॥
व्याख्या-
पहले भी, जिनके राग, भय और क्रोध सर्वथा नष्ट हो गए थे और जो मुझ में अनन्य प्रेमपूर्वक स्थित रहते थे, ऐसे मेरे आश्रित रहने वाले बहुत से भक्त उपर्युक्त ज्ञान रूप तप से पवित्र होकर मेरे स्वरूप को प्राप्त हो चुके हैं॥
आज का सुविचार और गीता ज्ञान (Aaj ka Suvichar) (Geeta Gyan):-
हम सब इस दुनियाँ के मोह पाश में बंधें हुए हैं. अगर हम इस बंधन से छूटना चाहते हैं, भगवान को जानना चाहते हैं तो हमें इस दुनियां दारी में बाँधने वालीं इन्द्रियों के वश से बाहर आना होगा. जब तक हमारी भावनाएं जीवित हैं तब तक उस भगवान को जान पाना मुश्कित हैं. जो व्यक्ति इन इन्दिर्यों में रमण करता है, वो इन इन्द्रियों के सुख से सुखी और दुःख से दुखी होता रहता है. उसके लिए उस इस दुनियां से परे रहने वाले परमात्मा को जान पाना कठिन ही नहीं नामुमकिन हैं. उस परम पिता को जाननें के लिए इन इन इन्दिर्यों को वश में करना है उनके वश में नहीं होना है.
ज्योतिषाचार्य डॉ सुमित की ओर से प्रार्थना है, कि आपका दिन शुभ हो🙏🏻💐
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